रूस का ‘एयर स्ट्राइक ऑफर’: भारत को Su-57 का प्रस्ताव, F-35 पर सस्पेंस

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

मिडिल ईस्ट में जंग की आग और होर्मुज स्ट्रेट पर तेल सप्लाई के संकट ने दुनिया की रणनीतिक बिसात को अचानक बदल दिया है। इसी तनाव के बीच रूस ने भारत के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिसने वॉशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हलचल पैदा कर दी है।

रूस ने भारत को 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 ऑफर किया है।

यह सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं… बल्कि एयर पावर की वैश्विक राजनीति में भारत की नई चाल हो सकती है। और दिलचस्प बात यह है कि यह ऑफर तब आया है जब भारत अभी तक अमेरिका के F-35 सौदे को हरी झंडी नहीं दे पाया है।

रूस का ऑफर: टेक्नोलॉजी के साथ ‘ट्रस्ट पैकेज’

रूसी प्रस्ताव सिर्फ विमान बेचने का नहीं है. इसके साथ फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड देने की बात भी कही गई है। डिफेंस डील की दुनिया में यह ऐसा ऑफर है जो अक्सर आसानी से नहीं मिलता.

रक्षा विशेषज्ञ अजित उज्जैनकर मानते हैं कि अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो भारत न सिर्फ फाइटर जेट खरीदेगा बल्कि एविएशन टेक्नोलॉजी के कई अहम हिस्सों पर खुद की पकड़ मजबूत करेगा।

कूटनीति की भाषा में इसे कहते हैं “जेट से ज्यादा जेनरेशन की साझेदारी।”

विंग्स इंडिया 2026 में दिखी रणनीति की झलक

यह प्रस्ताव पहली बार तब चर्चा में आया जब रूस ने Wings India 2026 एग्जीबिशन में Su-57 का अपडेटेड वर्जन प्रदर्शित किया। भारतीय अधिकारियों और रूसी प्रतिनिधियों के बीच हाई लेवल बातचीत भी हुई। रूस चाहता है कि भारत फिर से FGFA प्रोग्राम में शामिल होकर 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट संयुक्त रूप से बनाए।

दूसरे शब्दों में कहें तो रूस का संदेश साफ है “खरीदिए नहीं… साथ बनाइए।”

भारत के सामने क्यों जरूरी है 5वीं पीढ़ी का जेट

इस समय भारत के पास 4.5 जेनरेशन के अत्याधुनिक विमान हैं जैसे

  • Dassault Rafale
  • Sukhoi Su-30MKI

लेकिन असली गेम 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों का है. चीन पहले ही Chengdu J‑20, Shenyang J‑35 जैसे विमान तैनात कर चुका है।

उधर अमेरिका का F‑35 Lightning II दुनिया का सबसे चर्चित 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट माना जाता है। ऐसे में भारत के पास फिलहाल अपना ऑपरेशनल 5th generation jet नहीं है

2018 में क्यों टूटा था FGFA प्रोजेक्ट

भारत और रूस पहले भी FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम पर साथ काम कर रहे थे। लेकिन 2018 में भारत ने इस परियोजना से दूरी बना ली। मुख्य कारण थे बढ़ती लागत, भारतीय इंजीनियरों की सीमित भागीदारी, स्टील्थ क्षमता को लेकर चिंताएँ, इंजन टेक्नोलॉजी पर सवाल इसके बाद भारत ने अपने स्वदेशी प्रोजेक्ट HAL AMCA पर फोकस बढ़ा दिया।

AMCA की पहली उड़ान 2029 के आसपास प्रस्तावित है।

पाकिस्तान-चीन समीकरण और नई रणनीति

इसी बीच खबरें आई हैं कि चीन पाकिस्तान को भी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट देने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो दक्षिण एशिया का एयर पावर बैलेंस तेजी से बदल सकता है। यही कारण है कि रूस का यह ऑफर सिर्फ एक डिफेंस डील नहीं बल्कि स्ट्रेटेजिक टाइमिंग वाला प्रस्ताव माना जा रहा है।

आसमान की शतरंज और भारत की अगली चाल

भारत के सामने अब तीन रास्ते हैं

  1. अमेरिका का F-35 सौदा
  2. रूस का Su-57 ऑफर
  3. स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट

तीनों विकल्प अलग रणनीति, अलग जोखिम और अलग भविष्य दिखाते हैं। लेकिन एक बात साफ है 21वीं सदी की जंग जमीन पर कम और आसमान में ज्यादा तय होगी। और इस आसमान में कौन सा जेट उड़ान भरेगा…यह फैसला आने वाले वर्षों में भारत की रक्षा नीति की दिशा तय करेगा।

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